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उपनयन जनेऊ यज्ञोपवीत मुहूर्त 2020

जनेऊ यज्ञोपवीत मुहूर्त, Janeu Yagyopavit Muhurat 2020

हिन्दू धर्म में सोलह संस्कारों को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यज्ञोपवीत जनेऊ इन्ही संस्कारों में दसवां संस्कार है। जो कर्णभेद संस्कार के बाद किया जाता है। यज्ञोपवीत संस्कार को उपनयन संस्कार भी कहा जाता है। पुरुष के जीवन में इस संस्कार का बहुत महत्व होता है। इस संस्कार में बालक को जनेऊ पहनाया जाता है और इसी दिन से उसका विद्यारंभ होता है। जनेऊ संस्कार का अर्थ होता है की शिशु अब विद्या प्राप्त करने के योग्य हो गया है।

उपनयन संस्कार में क्या किया जाता है?

इस संस्कार में सूत से बने पवित्र धागे को पुरुष के बाएं कंधे के ऊपर और दाईं भुजा के नीचे पहनाया जाता है। उपनयन संस्कार हमेशा किसी यज्ञोपवीतधारी या विद्वान ब्राह्मण के द्वारा किया जाता है। रीती-रिवाजों के अनुसार निर्धारित आयु तक प्रत्येक जातक का उपनयन संस्कार होना जरुरी होता है।

जनेऊ क्या है?

जनेऊ एक विशिष्ट सूत्र को विशेष विधि से ग्रंथित करके बनाया जाता है। इसमें सात ग्रंथियां लगाई जाती हैं। ब्राह्मणों के यज्ञोपवीत में ब्रह्मग्रंथि होती है। तीन सूत्रों वाले यज्ञोपवीत को हमेशा गुरु दीक्षा के बाद धारण किया जाता है। तीन सूत्र हिन्दू धर्म के त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक हैं।

अपवित्र होने पर जनेऊ को बदल दिया जाता है। बिना यज्ञोपवीत धारण किये अन्न जल ग्रहण नहीं किया जाता। कहते हैं, शादी होने से पूर्व जनेऊ पहनना बहुत जरुरी होता है। इसलिए यह संस्कार हमेशा शुभ मुहूर्त में किया जाता है। यहाँ हम आपको जनेऊ उपनयन मुहूर्त 2020 बता रहे हैं।

जनेऊ धरण करने का मंत्र

हिन्दू धर्म के अनुसार, जजनेऊ पहनना शिक्षा लेने के समान होता है। इसीलिए जनेऊ धारण करते समय विशेष मंत्र पढ़े जाते हैं। वह मंत्र निम्नलिखित हैं –

यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्रं प्रतिमुंच शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।।

जनेऊ धारण करने का मुहूर्त

उपनयन हमेशा शुभ मुहूर्त में किया जाता है। यहाँ हम जनेऊ मुहूर्त चक्र दे रहे हैं जिसमे जनेऊ पहनने का शुभ नक्षत्र, शुभ तिथि, शुभ वार और शुभ लग्न दिया गया है। अगर आपके पास कोई मुहूर्त है तो आप मुहूर्त टेबल से मिलाकर देख सकते हैं की मुहूर्त उपनयन के लिए उचित है या नहीं?

नक्षत्र मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, हस्त, चित्रा, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, अश्विनी, मूल, पूर्वाभाद्रपद, पूर्वाषाढ़, पूर्वाफाल्गुनी, पुष्य, अश्लेषा
वार रविवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
तिथि द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, दशमी, एकादशी, द्वादशी
लग्न लग्न से नौवें, पांचवे, पहले, चौथे, सातवें, दसवें स्थान में शुभग्रह के रहने पर उपनयन संस्कार करना शुभ होता है।

उपनयन जनेऊ मुहूर्त 2020

जनवरी 2020 जनेऊ मुहूर्त

तारीख दिन नक्षत्र तिथि
15 जनवरी 2020 बुधवार उत्तराफाल्गुनी पंचमी
26 जनवरी 2020 रविवार धनिष्ठा द्वितीया
27 जनवरी 2020 सोमवार शतभिषा तृतीया
29 जनवरी 2020 बुधवार पूर्वाभाद्रपद चतुर्थी
30 जनवरी 2020 गुरुवार उत्तराभाद्रपद पंचमी

फरवरी 2020 जनेऊ मुहूर्त

तारीख दिन नक्षत्र तिथि
7 फरवरी 2020 शुक्रवार पुनर्वसु त्रयोदशी
13 फरवरी 2020 गुरुवार हस्त पंचमी
26 फरवरी 2020 बुधवार उत्तराभाद्रपद तृतीया
28 फरवरी 2020 शुक्रवार आश्विन पंचमी

मार्च 2020 जनेऊ मुहूर्त

तारीख दिन नक्षत्र तिथि
4 मार्च 2020 बुधवार आर्द्रा नवमी
5 मार्च 2020 गुरुवार पुनर्वसु दशमी
6 मार्च 2020 शुक्रवार पुष्य एकादशी, द्वादशी
11 मार्च 2020  बुधवार  हस्त  द्वितीया 

अप्रैल 2020 जनेऊ मुहूर्त

तारीख दिन नक्षत्र तिथि
19 अप्रैल 2020  रविवार  पूर्वभाद्रपद  द्वादशी 
26 अप्रैल 2020  रविवार  रोहिणी  तृतीया 
28 अप्रैल 2020  मंगलवार  आर्द्रा  पंचमी 

मई 2020 जनेऊ मुहूर्त

तारीख दिन नक्षत्र तिथि
3 मई 2020 रविवार  पूर्वाफाल्गुनी  दशमी 
18 मई 2020 सोमवार  उत्तराभाद्रपद  एकादशी 
24 मई 2020 रविवार  मृगशीर्ष  द्वितीया 
27 मई 2020  बुधवार  पुष्य  पंचमी 

जून 2020 जनेऊ मुहूर्त

तारीख दिन नक्षत्र तिथि
15 जून 2020 सोमवार  रेवती  दशमी 
16 जून 2020 मंगलवार  अश्विनी  दशमी / एकादशी 
23 जून 2020 मंगलवार  पुनवर्सु  द्वितीया 
24 जून 2020  बुधवार  पुष्य  तृतीया 
25 जून 2020  गुरूवार  आश्लेषा  चतुर्थी / पंचमी 
30 जून 2020  मंगलवार  स्वाती   दशमी