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जनेऊ, उपनयन, यज्ञोपवीत मुहूर्त 2019

जनेऊ पहनने के लिए विशेष पूजा और रस्म की जाती है जो केवल शुभ मुहूर्त में होती है। यहाँ हम आपको वर्ष 2019 के लिए उपनयन संस्कार, यज्ञोपवीत, जनेऊ धारण करने का शुभ मुहूर्त दे रहे हैं।

जनेऊ उपनयन मुहूर्त 2019

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सोलह संस्कारों में उपनयन संस्कार को दसवां संस्कार कहा जाता है जिसे कर्णभेद संस्कार के बाद किया जाता है। उपनयन संस्कार को यज्ञोपवीत संस्कार भी कहा जाता है, पुरुष के जीवन में इसका बहुत खास महत्व होता है। उपनयन संस्कार में जनेऊ पहनाया जाता है और विद्यारंभ होता है। मुख्य रूप से इसे जनेऊ पहनाने का संस्कार कहा जाता है।

उपनयन संस्कार में सूत से बने पवित्र धागे को व्यक्ति के बाएं कंधे के ऊपर तथा दाई भुजा के नीचे पहनाया जाता है और यह संस्कार यज्ञोपवीतधारी व्यक्ति या विद्वान ब्राह्मण द्वारा ही किया जाता है।

यज्ञोपवीत संस्कार का महत्व :

यज्ञोपवीत या जनेऊ एक विशिष्ट सूत्र को विशेष विधि से ग्रन्थित करके बनाया जाता है। इसमें सात ग्रन्थियां लगायी जाती हैं। ब्राम्हणों के यज्ञोपवीत में ब्रह्मग्रंथि होती है। तीन सूत्रों वाले इस यज्ञोपवीत को गुरु दीक्षा के बाद हमेशा धारण किया जाता है। तीन सूत्र हिंदू त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक होते हैं।

अपवित्र होने पर यज्ञोपवीत बदल लिया जाता है। बिना यज्ञोपवीत धारण कये अन्न जल गृहण नहीं किया जाता। कहा जाता है शादी होने से पहले जनेऊ धारण करना बहूत जरुरी होता है। जनेऊ धारण करने के लिए भी निश्चित मुहुर्त में पूजा पाठ और रस्म होता है। आज हम जनेऊ धारण का रस्म के लिए शुभ मुहुर्त देने जा रहे हैं।

उपनयन संस्कार कब करते हैं?

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, ब्राह्मण जातकों का आठवें वर्ष में, क्षत्रिय जातकों का ग्यारहवें और वैश्य जातकों का जनेऊ बारहवें वर्ष में किया जाता है।

अन्य रीती के अनुसार, ब्राह्मण जातकों का उपनयन संस्कार पांचवें वर्ष में, क्षत्रिय जातक का छठे वर्ष में और वैश्य जातक का उपनयन आठवें वर्ष में किया जा सकता था। रीती-रिवाज के अनुसार निर्धारित आयु तक प्रत्येक जातक का उपनयन संस्कार करना अनिवार्य होता है। कहा जाता है शादी होने से पहले जनेऊ धारण करना बहुत जरुरी होता है। जनेऊ धारण करने के लिए विशेष पूजा और रस्म कराई जाती है जो केवल शुभ मुहूर्त में होती है। यहाँ हम आपको वर्ष 2019 के लिए उपनयन संस्कार, यज्ञोपवीत, जनेऊ धारण करने का शुभ मुहूर्त दे रहे हैं।

जनेऊ धारण करने का मुहूर्त कैसे निकालें?

नक्षत्र मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, हस्त, चित्रा, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, अश्विनी, मूल, पूर्वाभाद्रपद, पूर्वाषाढ़, पूर्वाफाल्गुनी, पुष्य, अश्लेषा
वार रविवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
तिथि द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, दशमी, एकादशी, द्वादशी
लग्न लग्न से नौवें, पांचवे, पहले, चौथे, सातवें, दसवें स्थान में शुभग्रह के रहने पर उपनयन संस्कार करना शुभ होता है।

किसी-किसी आचार्य के अनुसार, तीनो उत्तरा, रेवती और अनुराधा में भी यज्ञोपवीत करना शुभ होता है।

जनेऊ धारण करने का मंत्र 

जनेऊ धारण करना एक शिक्षा ग्रहण करने के समान होता है इसलिए इस धारण करते समय विशेष मंत्र पढ़े जाते हैं। यह मंत्र निम्नलिखित है –

यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्रं प्रतिमुंच शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।।


उपनयन संस्कार, यज्ञोपवीत, जनेऊ धारण मुहूर्त 2019

उपनयन संस्कार मुहूर्त जनवरी 2019

तारीख दिन नक्षत्र तिथि
18 जनवरी 2019 शुक्रवार रोहिणी द्वादशी
25 जनवरी 2019 शुक्रवार उत्तराफाल्गुनी पंचमी
27 जनवरी 2019 रविवार चित्रा सप्तमी
30 जनवरी 2019 बुधवार अनुराधा दशमी

उपनयन संस्कार मुहूर्त फरवरी 2019

तारीख दिन नक्षत्र तिथि
1 फरवरी 2019 शुक्रवार मूल द्वादशी
6 फरवरी 2019 बुधवार शतभिषा द्वितीया
7 फरवरी 2019 गुरुवार शतभिषा तृतीया
8 फरवरी 2019 शुक्रवार पूर्वाभाद्रपद तृतीया
10 फरवरी 2019 रविवार रेवती पंचमी
11 फरवरी 2019 सोमवार अविश्वास षष्ठी
14 फरवरी 2019 गुरुवार रोहिणी नवमी
15 फरवरी 2019 शुक्रवार मृगशिरा दशमी
17 फरवरी 2019 रविवार पुनर्वसु त्रयोदशी
21 फरवरी 2019 गुरुवार उत्तराफाल्गुनी द्वितीया
24 फरवरी 2019 रविवार स्वाति पंचमी
28 फरवरी 2019 गुरुवार मूल नवमी

उपनयन संस्कार मुहूर्त मार्च 2019

तारीख दिन नक्षत्र तिथि
1 मार्च 2019 शुक्रवार पूर्वाषाढ़ दशमी
3 मार्च 2019 रविवार श्रवण द्वादशी
8 मार्च 2019 शुक्रवार उत्तराभाद्रपद द्वितीया
13 मार्च 2019 बुधवार रोहिणी सप्तमी