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एकादशी व्रत 2023 तिथियां और वार

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हिंदू धर्म में एकादशी या ग्यारस एक महत्वपूर्ण तिथि है साथ ही इस तिथि का बहुत अधिक महत्व होने के साथ एकादशी व्रत की बड़ी महिमा है। पद्म पुराण के अनुसार स्वयं महादेव भोलेबाबा ने नारद जी को उपदेश देते हुए कहा था, एकादशी महान पुण्य देने वाली होती है और बहुत ही फलदायक है। कहा जाता है कि जो मनुष्य एकादशी का व्रत रखता है उसके पितृ और पूर्वज कुयोनि को त्याग स्वर्ग लोक चले जाते हैं यानी की उन्हें मरने के बाद नरक का दुःख भोगने की बजाय स्वर्ग की प्राप्ति होती है। तो आइए अब एकादशी से जुड़े से जुड़े कुछ तथ्य व् जानकारियां आपको बताते हैं।

क्या होती है एकादशी?

हिंदू पंचांग की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहा जाता है और एकादशी का दिन हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है। एकादशी शब्द को संस्कृत भाषा से लिया गया है और इस शब्द का अर्थ होता है ‘ग्यारह’। एक महीने में एकादशी का दिन दो बार आता है एक शुक्ल पक्ष के बाद और दूसरी कृष्ण पक्ष के बाद आता है। पूर्णिमा के बाद आने वाली एकादशी को कृष्ण पक्ष की एकादशी कहा जाता है साथ ही अमावस्या के बाद आने वाली एकादशी को शुक्ल पक्ष की एकादशी कहते हैं। ऐसे ही सालभर में 24 एकादशी आती है साथ ही प्रत्येक पक्ष की एकादशी का अपना अलग महत्व है। इसके अलावा हिन्दू धर्म में ढेर सारे व्रत किए जाते हैं लेकिन इन सभी व्रतों में एकादशी का व्रत सबसे पुराना माना जाता है और बहुत फलदायी माना जाता है।

साल भर में आने वाली एकादशी के नाम?

एक साल में चौबीस एकादशी आती है और उन सभी एकादशी के नाम इस प्रकार हैं :- पौष पुत्रदा एकादशी, षटतिला एकादशी, जया एकादशी, विजया एकादशी, आमलकी एकादशी, पापमोचिनी एकादशी, कामदा एकादशी, वरुथिनी एकादशी, मोहिनी एकादशी, अपरा एकादशी, निर्जला एकादशी, योगिनी एकादशी, देवशयनी एकादशी, कामिका एकादशी, पद्मिनी एकादशी, परम एकादशी, श्रावण पुत्रदा एकादशी, अजा एकादशी, परिवर्तिनी एकादशी, इंदिरा एकादशी, पापांकुशा एकादशी, रमा एकादशी, देवुत्थान एकादशी, उत्त्पन्ना एकादशी, मोक्षदा एकादशी।

एकादशी का क्या महत्व होता है?

पुराणों में हर चीज के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है उसी तरह एकादशी के महत्व के बारे में भी पुराणों में उल्लेख किया गया है एकादशी के दिन को ‘हरी दिन’ और ‘हरी वासर’ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन व्रत करने का बहुत अधिक महत्व होता है साथ ही इस व्रत को वैष्णव और गैर-वैष्णव दोनों ही समुदायों द्वारा मनाया जाता है। एकादशी के व्रत के बारे में ऐसा तक कहा जाता है कि एकादशी व्रत हवन, यज्ञ , वैदिक कर्म-कांड आदि से भी अधिक फलदायक होता है।

साथ ही एकादशी के व्रत को रखने की एक मान्यता यह भी है कि इससे आपके पूर्वज या पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति होती है और उनकी आत्मा को शांति मिलती है। स्कन्द पुराण में भी एकादशी व्रत के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है। जो भी व्यक्ति इस व्रत को रखता है उनके लिए एकादशी के दिन गेहूं, मसाले और सब्जियां आदि का सेवन वर्जित होता है। साथ ही एकादशी के व्रत की शुरुआत एक दिन पहले ही हो जाती है यानि कि एकादशी का व्रत दशमी से ही शुरू हो जाता है।

साल 2023 में आने वाली एकादशी के दिन और वार

एकादशी की तारीख व् वारएकादशी का नाम
02 जनवरी 2023, सोमवारपौष पुत्रदा एकादशी
18 जनवरी 2023, बुधवारषटतिला एकादशी
01 फरवरी 2023, बुधवारजया एकादशी
16 फरवरी 2023, गुरुवारविजया एकादशी
03 मार्च 2023, शुक्रवारआमलकी एकादशी
18 मार्च 2023, शनिवारपापमोचिनी एकादशी
01 अप्रैल 2023, शनिवारकामदा एकादशी
16 अप्रैल 2023, रविवारवरुथिनी एकादशी
01 मई 2023, सोमवारमोहिनी एकादशी
15 मई 2023, सोमवारअपरा एकादशी
31 मई 2023, बुधवारनिर्जला एकादशी
14 जून 2023, बुधवारयोगिनी एकादशी
29 जून 2023, गुरुवारदेवशयनी एकादशी
13 जुलाई 2023, गुरुवारकामिका एकादशी
29 जुलाई 2023, शनिवारपद्मिनी एकादशी
12 अगस्त 2023, शनिवारपरम एकादशी
27 अगस्त 2023, रविवारश्रावण पुत्रदा एकादशी
10 सितंबर 2023, रविवारअजा एकादशी
25 सितंबर 2023, सोमवारपरिवर्तिनी एकादशी
10 अक्टूबर 2023, मंगलवारइन्दिरा एकादशी
25 अक्टूबर 2023, बुधवारपापांकुशा एकादशी
09 नवंबर 2023, गुरुवाररमा एकादशी
23 नवंबर 2023, गुरुवारदेवुत्थान एकादशी
08 दिसंबर 2023, शुक्रवारउत्पन्ना एकादशी
23 दिसंबर 2023, शनिवारमोक्षदा एकादशी
एकादशी व्रत 2023 तिथियां और वार

एकादशी व्रत के नियम

  • जो भी व्यक्ति एकादशी व्रत रखने का प्रण लेता है उसके लिए यह जानना बहुत जरुरी होता है की इस व्रत के नियम बहुत ही सख्त होते है जिसमें व्रत करने वाले को एकादशी तिथि के पहले सूर्यास्त से लेकर एकादशी के अगले सूर्योदय तक उपवास रखना पड़ता है। यानी की यह व्रत देशी तिथि की शाम से लेकर द्वादशी की सुबह तक चलता है।
  • यह व्रत किसी भी लिंग या किसी भी आयु का व्यक्ति अपनी इच्छा से रख सकता है।
  • एकादशी व्रत रखने पर दशमी के दिन से ही श्रद्धालुओं को मांस-मछली, प्याज, दाल (मसूर की) और शहद जैसे खाद्य-पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह खाद्य पदार्थ एकादशी के व्रत में वर्जित होते हैं।
  • व्रत रखने वाले व्यक्ति को दशमी की रात के समय से ही पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
  • एकादशी के दिन आपको किसी भी पेड़ के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए क्योंकि इस दिन वृक्ष से पत्ते तोड़ना भी ‍वर्जित होता है।
  • व्रत के दिन आप स्नान आदि करने के बाद आप मंदिर में जाकर गीता का पाठ करें या फिर पंडितजी से गीता का पाठ सुनें। आप चाहे तो घर में भी पाठ कर सकते हैं जैसे की सच्चे मन से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र जप करें। भगवान विष्णु का स्मरण और उनकी प्रार्थना करें।
  • एकादशी के व्रत में दान-धर्म की भी बहुत मान्यता है इसीलिए अपनी यथाशक्ति दान करें, गरीबो को भोजन करवाएं किसी जरूरतमंद की मदद करे आदि ऐसा करने का आपको बहुत ज्यादा पुण्य लगता है।
  • यह व्रत एकादशी के अगले दिन यानी की द्वादशी के दिन सम्पूर्ण होता है ऐसे में आप द्वादशी के दिन सुबह नहा धोकर मंदिर में पंडित को दान दक्षिणा दें और इस व्रत का पारण करें। जैसे की आप इस दिन ब्राह्मणों को मिष्ठान्न और दक्षिणा आदि दे सकते हैं।

एकादशी व्रत में क्या खाएं?

ताजे फल, मेवे, कुट्टू, सामक, जैतून, दूध, चीनी, अदरक, काली मिर्च, साबूदाना, आलू, शकरकंद आदि खा सकते हैं। क्योंकि व्रत का खाना सात्विक होना चाहिए इसीलिए इस दिन ज्यादा तेल मसाले वाले आहार का सेवन नहीं करना चाहिए।

एकादशी को क्या नहीं करना चाहिए?

  • वृक्ष से पत्ते न तोड़ें क्योंकि एकादशी के दिन ऐसा करना अशुभ माना जाता है।
  • हो सके तो एकादशी के दिन घर में झाड़ू न लगाएं। क्योंकि घर में झाड़ू आदि लगाने से चीटियों या छोटे-छोटे जीवों के मरने का डर होता है। और इस दिन जीव हत्या करना पाप होता है।
  • बाल कटवाना, नाख़ून काटना, दाढ़ी बनवाना इस दिन बिल्कुल भी अच्छा नहीं माना जाता है।
  • एकादशी के दिन चावल का सेवन भी वर्जित होता है ऐसे में आपको गलती से भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • व्रत के दिन अन्न का सेवन भी वर्जित होता है ऐसे में आप घर में या बाहर से किसी का दिया हुआ अन्न आदि न खाएं।
  • मन में केवल अच्छे विचार और भगवान् का नाम रखें और गलत विचारों को नहीं आने दें।
  • गोभी, पालक, शलजम आदि का सेवन न करें।
  • किसी को भी अपशब्द नहीं बोलें।

तो यह है एकादशी से जुडी सम्पूर्ण जानकारी, इसके अलावा यदि आप एकादशी का व्रत रखते हैं तो साल 2023 में एकादशी कब- कब है उसके बारे में भी सम्पूर्ण जानकारी दी गई है।

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