कब है दिवाली, भाई दूज, विश्वकर्मा डे और गोवर्धन पूजा

त्यौहारों का महत्व भारत देश में बहुत से त्यौहार मनाएं जाते हैं और हर एक त्यौहार का अपना अलग मतलब और अपनी एक अलग ख़ुशी होती है। और त्यौहार चाहे कोई भी हो बस इसके आने से घर में ख़ुशी का आगमन हो जाता है। और साल एक का एक महीना ऐसा होता है जिसमे एक साथ बहुत से त्यौहार आते है इस माह में धनतेरस से त्यौहार की शुरुआत होती है, और दिवाली, भाई दूज, गोवर्धन पूजा जैसे त्यौहार एक साथ आते हैं। और दिवाली को तो वर्ष का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है, और इस दिन हर जगह दीपक से रौशनी की जाती है इसीलिए इसे रौशनी का त्यौहार भी माना जाता है। तो

वैभव लक्ष्मी व्रत कैसे करें? और क्या फायदे होते हैं

वैभव लक्ष्मी व्रत हिन्दू धर्म में पूजा पाठ, त्यौहारों को जितना महत्व दिया जाता है, उतना ही महत्व व्रत को भी दिया जाता है। और भगवान की असीम कृपा परिवार पर बनी रहे, घर में सुख समृद्धि हो, धन की कमी न आये, और भी बहुत सी इच्छाओं को पूरा करने के लिए व्यक्ति व्रत आदि रखता है। ऐसे ही वैभव लक्ष्मी का भी व्रत शुक्रवार के दिन रखा जाता है। माता लक्ष्मी को अनेक रूपों में पूजा जाता है जैसे की वैभव लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, वरदलक्ष्मी आदि। ऐसा माना जाता है की जो भी व्यक्ति पूरे श्रद्धाभाव से वैभव लक्ष्मी के व्रत को करता है उसकी सभी मनोकामनाएं

दशहरा 2019 कब है? जानिए एक से नौ पूजा के बारे में

दशहरा क्यों मनाया जाता है साल भर में जितने भी त्यौहार आते है हर त्यौहार के अपने अलग मायने होते है, और हर त्यौहार कुछ न कुछ सन्देश जरूर देता है। जैसे की दशहरा, इसके विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है। और यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई की विजय का सन्देश देता है। इस दिन भगवान राम ने अहंकारी रावण को मार गिराया था, और सीता माता को उसकी कैद से मुक्त करवाया था। साथ ही इस दिन माँ दुर्गा ने भी इस दिन महिषासुर का संहार किया था इसीलिए इसे विजयदशमी भी कहा जाता है। इसीलिए इस दिन माँ दुर्गा की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। पौराणिक कथाओं के

धनतेरस क्यों खास होता है? 2019 धनतेरस शुभ मुहूर्त

धनतेरस क्यों खास होता है धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। दीपावली साल भर के प्रमुख त्यौहारों में से एक है और ऐसा माना जाता है की धनतेरस के दिन से ही दीपावली की शुरुआत होती है और भाई दूज तक रहती है। धनतेरस के दिन भगवान कुबेर, माता लक्ष्मी व् धन्वन्तरि की पूजा की जाती है। देवताओं और असुरों के द्वारा मिलकर किए गये समुद्र मंथन के दौरान प्राप्त हुए चौदह रत्नों में धन्वन्तरि व माता लक्ष्मी भी शामिल हैं, इसीलिये इस दिन इनकी पूजा करने का बहुत

श्राद्ध 2019 कब से शुरू है और कब से कब तक है

श्राद्ध क्या होता हैशिशु के जन्म से लेकर मृत्यु के प्राप्त होने तक बहुत से संस्कार किये जाते हैं। और अंत्येष्टि को अंतिम संस्कार माना जाता है। लेकिन अंत्येष्टि के बाद भी कुछ ऐसे काम होते हैं कर्म होते हैं जो मृतक से सम्बंधित खासकर मृतक की संतान को करना होता है। श्राद्ध कर्म उन्हीं में से एक है जो व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी संतान को करना होता है। वैसे तो हर महीने की अमावस्या के दिन श्राद्ध कर्म किया जा सकता है परन्तु भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक श्राद्ध कर्म करने का विधान है। इसी कारण

2019 भाई दूज कब है? शुभ मुहूर्त

साल भर में बहुत से त्यौहार मनाएं जाते है, यह त्यौहार सभी के लिए खुशियों और प्यार से भरपूर होते हैं। साथ ही सालभर में दो त्यौहार ऐसे भी आते हैं जो भाई बहन के प्यार प्रेम को बढ़ाने और उनके रिश्ते की डोर को और भी मजबूत करते हैं, और वो त्यौहार हैं रक्षा बंधन और भाई दूज। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई बहन के प्यार को समर्पित त्यौहार भाई दूज मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर चन्दन और कुमकुम का तिलक भाई की लम्बी उम्र की कामना करते हुए सुख समृद्धि से भरपूर रहने की कामना करती है।उसके बाद भाई भी अपनी

वीरवार (बृहस्पति) का उद्यापन ऐसे करें

वीरवार का व्रतवीरवार का व्रत विष्णु भगवान के लिए रखा जाता है, और साथ ही माता लक्ष्मी की भी पूजा आराधना की जाती है। ऐसा माना जाता है की गुरुवार को बृहस्पति देव की पूजा करने और व्रत रखने से धन, यश, विद्या, पुत्र, जल्दी विवाह, घर में सुख समृद्धि आदि मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साथ ही बृहस्पति या गुरु को बुद्धि और शिक्षा का देवता भी माना जाता है। वीरवार का व्रत कोई भी स्त्री, पुरुष, लड़का, लड़की आदि कर सकते हैं। वीरवार के व्रत में पीले रंग का बहुत अधिक महत्व होते हैं, और व्रत करने वाला इसे अपनी इच्छानुसार जितने व्रत