शादी विवाह मुहूर्त 2019

विवाह का शुभ मुहूर्त 2019

2019 में शादी विवाह का शुभ मुहूर्त, लग्न का शुभ दिन 2019 के लिए। अपने नाम और जन्म तिथि के अनुसार विवाह का मुहूर्त निकलवाएं। ताकि नया जीवन आपके लिए खुशियां लाए और दांपत्य जीवन सुखी रहे।

जुलाई 2019

जुलाई 2019 में लग्न और नक्षत्र के अनुसार कोई मुहूर्त नहीं है। क्यूंकि देवशयनी एकादशी से देवउठान एकादशी तक विवाह का कोई मुहूर्त नहीं होता। देवउठान एकादशी के दिन तुलसी विवाह के बाद दोबारा से विवाह शुरू हो जाते हैं। इसलिए बाकी के सभी मुहूर्त देवउठान एकादशी के बाद के हैं। जुलाई 2019 में विवाह का कोई मुहूर्त नहीं है।

अगस्त 2019

जुलाई की तरह अगस्त 2019 में भी शादी का कोई मुहूर्त नहीं है।

सितंबर 2019

सितंबर 2019 में भी शादी का कोई मुहूर्त नहीं है।

अपने नाम, राशि और जन्मतिथि के अनुसार मुहूर्त निकलवाएं

2019 – 2020 में अपने नाम, जन्मतिथि और  लग्न के अनुसार मुहूर्त निकलवाने के लिए 251 रूपए का डोनेशन करें। हम आपको कुंडली के अनुसार मुहूर्त निकालकर देंगे, जो विवाह के लिए शुभ होगा।

अक्टूबर 2019

जुलाई, अगस्त और सितंबर की तरह अक्टूबर 2019 में भी शादी का कोई मुहूर्त नहीं हैं। लेकिन अगले महीने से तुलसी विवाह के बाद विवाह शुरू हो जाएंगे।

नवंबर 2019

  • 8 नवंबर 2019, शुक्रवार, नक्षत्र – उत्तरा भाद्रपद, द्वादशी
  • 9 नवंबर 2019, शनिवार, नक्षत्र – उत्तरा भाद्रपद/रेवती, द्वादशी, त्रयोदशी
  • 10 नवंबर 2019, रविवार, नक्षत्र – रेवती, त्रयोदशी
  • 14 नवंबर 2019, गुरुवार, नक्षत्र – रोहिणी/मृगशिरा, द्वितीया/तृतीया
  • 22 नवंबर 2019, शुक्रवार, नक्षत्र – उत्तरा फाल्गुनी/हस्त, एकादशी
  • 23 नवंबर 2019, शनिवार, नक्षत्र – हस्त, द्वादशी
  • 24 नवंबर 2019, रविवार, नक्षत्र – स्वाती, त्रयोदशी
  • 30 नवंबर 2019, शनिवार, नक्षत्र – उत्तरा आषाढ़, पंचमी

दिसंबर 2019

  • 5 दिसंबर 2019, गुरुवार, नक्षत्र – उत्तरा भाद्रपद, नवमी/दशमी
  • 6 दिसंबर 2019, शुक्रवार, नक्षत्र – उत्तरा भाद्रपद, दशमी
  • 7 दिसंबर 2019, शनिवार, नक्षत्र – रेवती, एकादशी
  • 11 दिसंबर 2019, बुधवार, नक्षत्र – रोहिणी, पूर्णिमा
  • 12 दिसंबर 2019, गुरुवार, नक्षत्र – मृगशिरा, पूर्णिमा/प्रतिपदा

विवाह हमेशा शुभ मुहूर्त में ही क्यों किया जाता है?

शादी विवाह को व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पल माना जाता है। इसलिए उससे जुड़े सभी रीती-रिवाजों का शुभ मुहूर्त में होना अनिवार्य होता है। क्यूंकि वर और कन्या का दाम्पत्य जीवन इसी बात पर निर्भर करता है की उनकी शादी सही मुहूर्त में हुआ हो।

अशुभ या गलत मुहूर्त में हुए विवाह सफल नहीं होते और ज्यादा दिन तक नहीं चल पाते। इसीलिए विवाह से पूर्व गणना करते समय खास सावधानियां बरती जाती है। ताकि आने वाला समय वर और कन्या के लिए खुशियां लाए।

केवल विवाह ही नहीं बल्कि विवाह से जुडी हरेक रस्म और रीती-रिवाज शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। हिन्दू धर्म के अनुसार शुभ विवाह की तिथि वर-वधु की जन्मराशी के आधार पर निकाली जाती है।

लड़के और लड़की की कुंडली मिलान करने के बाद जो तारीख तय की जाती है वह शादी का शुभ मुहूर्त कहलाती है। विवाह में जितना अधिक महत्व उससे जुड़ी रस्मों का होता है उतना ही महत्व शादी के शुभ मुहूर्त का होता है। इसलिए शुभ मुहूर्त निकलवाना अनिवार्य होता है।

विवाह का मुहूर्त कैसे निकालें?

शादी का मुहूर्त कैसे निकालें?

गृह विचार – विवाह में कन्या के लिए गुरुबल, वर के लिए सूर्यबल और दोनों के लिए चंद्रबल का विचार किया जाता है।

गुरुबल विचार – बृहस्पति कन्या की राशि से नवम, पंचम, एकादश, द्वितीया और सप्तम राशि में शुभ होता है। दशम, तृतीय, षष्ठ और प्रथम राशि में दान देने से शुभ और चतुर्थ, अष्टम, द्वादश राशि में अशुभ होता है।

सूर्यबल विचार – सूर्य वर की राशि से तृतीय, षष्ठ, दशम, एकादश राशि में शुभ होता है। प्रथम, द्वितीय, पंचम, सप्तम और नवम राशि में दान देने से शुभ और चतुर्थ, अष्टम, द्वादश राशि में अशुभ होता है।

चंद्रबल विचार – चंद्रमा, वर और कन्या की राशि में तीसरा, छठा, सातवां, दसवां, ग्यारहवां शुभ होता है। पहला, दूसरा, पांचवां, नौवां, दान देने से शुभ और चौथा, आठवां, बारहवां अशुभ होता है।

अपने नाम, राशि और जन्मतिथि के अनुसार मुहूर्त निकलवाएं

2019 – 2020 में अपने नाम, जन्मतिथि और लग्न के अनुसार मुहूर्त निकलवाने के लिए 251 रूपए का डोनेशन करें। हम आपको कुंडली के अनुसार मुहूर्त निकालकर देंगे, जो विवाह के लिए शुभ होगा।

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महत्वपूर्ण जानकारियां - विवाह का शुभ मुहूर्त निकालने से पहले जानिए जरुरी बातें।

विवाह मुहूर्त क्या होता है?

हिन्दू धर्म के अनुसार, वर-वधु की जन्मराशी के आधार पर शुभ विवाह की तिथि निकाली जाती है। लड़के और लड़की की कुंडली मिलान करने के बाद जो तारीख तय की जाती है वह विवाह का शुभ मुहूर्त कहलाती है। विवाह में जितना अधिक महत्व उससे जुड़ी रस्मों का होता है उतना ही महत्व लग्न मुहूर्त का होता है। इसलिए शुभ मुहूर्त निकलवाना अनिवार्य होता है।

किन दिनों में विवाह नहीं करना चाहिए?

कब विवाह नहीं करना चाहिए?
  • शास्त्रों के अनुसार, भद्राकाल में विवाह, आदि मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है। इसलिए भद्रा में विवाह नहीं करना चाहिए।
  • चातुर्मास 4 महीने की अवधि है, जो आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल देवउठनी एकादशी तक चलती है। इन चार महीनों के दौरान भी विवाह नहीं करना चाहिए।
  • पंचक, गुरु अस्त, तारा अस्त, मलमास, अधिकमास में भी विवाह करना शुभ नहीं होता

मुहूर्त चक्र विवाह के लिए

Vivah Muhurat Chakra
  • नक्षत्र – मूल, अनुराधा, मृगशिरा, रेवती, हस्त, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़, उत्तराभाद्रपद, स्वाति, मघा, रोहिणी
  • माह – ज्येष्ठ, माघ, फाल्गुन, वैशाख, मार्गशीर्ष, आषाढ़
  • शुभ लग्न – तुला, मिथुन, कन्या, वृष और धनु लग्न शुभ है। अन्य मध्यम होते हैं।
  • लग्न शुद्धि – लग्न से बारहवें शनि, दसवें मंगल, तीसरे शुक्र, लग्न में चंद्रमा और क्रूर ग्रह अच्छे नहीं होते। लग्नेश, शुक्र, चंद्रमा, छठे और आठवें में शुभ नहीं होते। लग्नेश और सौम्य ग्रह आठवें में अच्छे नहीं होते और सातवें में कोई भी ग्रह शुभ नहीं होता है।